How mineral rich Jharkhand became a backward state? hindi me

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खनिज संपन्न झारखंड कैसे बना पिछड़ा राज्य? जानिए Hindi me

आज हम एक ऐसे राज्य के बारे में hindi me बात करने जा रहे हैं जो अपने प्राकृतिक और खनिज संसाधनों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। 

भारत के पूर्वी भाग में स्थित ये राज्य है झारखंड। झारखंड का मतलब है “जंगल की भूमि”। 

यूपी बिहार पश्चिम बंगाल छत्तीसगढ़ और ओडिशा से सटे झारखंड पहाड़ों से घिरा होने के साथ अपने नदी झरने और पवित्र स्थान के लिए भी मशहूर है। 

आज इस पोस्ट के माध्यम से आप जानेंगे इतने खनिज सम्पदा होने के बावजूद भी Why is Jharkhand not Developing, why is jharkhand a poor state?

Must Read 101 important Facts About Jharkhand

  • संसाधनों से परिपूर्ण होने के बावजूद कैसे झारखण्ड की गिनती एक पिछड़े राज्य के तौर पर होती है।
  • झारखण्ड का औद्योगिक विकास 
  • झारखंड का आर्थिक सर्वेक्षण
  • झारखण्ड की वर्तमान चुनौतियां 
  • झारखण्ड का खनिज सम्पदा 
  • झारखंड के खनिजों का दोहन
  • खनिजों के दोहन को रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम 
  • कैसे झारखण्ड अपने आप को परिवर्तित कर सकता है। 

Why Is Jharkhand a Poor State? A Brief Introduction About Jharkhand hindi me

झारखंड के बारे में बुनियादी तथ्य

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झारखण्ड कब बना? झारखंड राज्य की स्थापना 15 नवंबर 2000 को बिहार राज्य से अलग होकर हुआ। 

पिछली जनगणना के अनुसार झारखंड में 69% हिंदू धर्म का पालन करता है, इसके अलावा झारखंड में 13.8% इस्लाम का पालन करता है 13% आदिवासी आबादी और 4% ईसाई धर्म का पालन करते हैं 

झारखंड में 30 से ज्यादा आदिवासी समूह है जिसमें मुंडा, उरांव, मल पहाड़िया, बिरहोर खड़िया प्रमुख जनजातियां है। 

राज्य का समग्र साक्षरता 67% है जहाँ  पुरुष साक्षरता 78% है और महिला साक्षरता 56% है। 

झारखण्ड का GDP 3,61,381 करोड़ रुपये है जिसमे झारखण्ड के औद्योगिक क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान है I

पर इसके बावजूद झारखण्ड आज भी एक पिछड़ा राज्य के तौर पर गिना जाता है। 

इसके अलावा झारखण्ड की प्राकृतिक खूबसूरती यहाँ पर्यटन की काफी संभावनाएं भी पैदा करती हैं। 

इतने खनिज सम्पदा राज्य होने के बावजूद झारखंड में विकास एक चुनौती पूर्ण चर्चा का विषय है। 

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What Jharkhand is Famous For? Mineral wealth of Jharkhand hindi me

झारखण्ड का खनिज सम्पदा 

झारखण्ड एक खनिज से परिपूर्ण राज्य है। यहाँ भारत का 40% खनिज और 29% कोयला का भंडार पाया जाता है। 

झारखण्ड का भौगोलिक स्तिथि इसे कोलकाता, हल्दिया और पाराद्वीप बंदरगाहों से जोड़ता है जहाँ से झारखण्ड के खनिज विश्व के दूसरे देशों तक निर्यात किया जाता है। 

झारखण्ड भारत का इकलौता राज्य है जो कोकिंग कोल्, यूरेनियम और पाइराइट पैदा करता है। 

साथ ही यूरेनियम, लौह अयस्क, अभ्रक और तांबा के उत्पादन में झारखंड पहले स्थान पर है। 

Industrial Development in Jharkhand hindi me

लौह उद्योग

  • राज्य में उद्योग की शुरुआत 1907 में जमशेदजी टाटा द्वारा TISCO company के साथ हुई।
  • TISCO Company की स्थापना पूर्वी सिंहभूम के साक्षी में किया गया जहां 1911 से उत्पादन शुरू हुआ। 
  • वर्ष 1948 में TELCO कंपनी की स्थापना हुई।
  • बाद में साक्षी का नाम बदल कर जमशेदपुर कर दिया गया और आज यह जगह पूरी दुनिया में टाटानगर के नाम से मशहूर है। 

इस्पात उद्योग

  • वर्ष 1964 में भारत सरकार ने सोवियत संघ की मदद से बोकारो में SAIL कंपनी को स्थापित किया।
  • जहाँ 1972 से उत्पादन उत्पादन शुरू हुआ।
  • आज इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 32 लाख टन तक है। 

अल्युमीनियम उद्योग

  • वर्ष 1938 में Indian Aluminium Company की शरुवात रांची जिला के मुरी से हुई जिसे आज़ादी के बाद Birla Group ने अधिग्रहण कर लिया।
  • आज इसकी उत्पादन क्षमता लगभग डेढ़ लाख टन हो गयी है। 

तांबा उद्योग

  • वर्ष 1924 में Indian Copper Corporation की स्थापना घाटशिला में की गई।
  • इसके अलावा झारखंड में usha Martin, Glass and cement industries भी मौजूद है। 

FCI फ़र्टिलाइज़र कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया को 1951 में धनबाद में स्थापित किया गया।

HEC

  • वर्ष 1958 में भारत सरकार ने रूस और चेकोस्लोवाकिया के साथ मिल कर HEC का स्थापना किया।
  • HEC ने सीमेंट, ताम्बा , इस्पात तथा अन्य बड़े बड़े उद्योगों के लिए मशीने तथा अन्य उपकरण बनाये। 
  • HEC के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड बड़े पानी जहाज़ों के लिए इंजन का निर्माण करती है। 

औद्योगिक क्षेत्र के अलावा झारखण्ड कृषि और इससे सम्बंधित क्षेत्र में भी एक अग्रणी राज्य है।

झारखण्ड दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेशम का उत्पादक वाला राज्य है। 

झारखण्ड में मुख्य्तः चार प्रकार के रेशम का पैदावार होता है – मलबरी , तसर , मुगा और ऐरी। 

इन सबके योगदान ने झारखण्ड को एक समृद्ध औद्योगिक राज्य बनाया है पर इसके बावजूद झारखण्ड आज भी एक पिछड़ा राज्य के तौर पर गिना जाता है। 

A look at the economic survey of Jharkhand hindi me

एक नज़र झारखण्ड के आर्थिक सर्वेक्षण पर

  • निति आयोग द्वारा प्रकाशित “सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स “SDG 2021” में झारखण्ड सेकंड लास्ट स्थान पर काबिज़ था।
  • झारखण्ड 56/100 अंक के 27 स्थान पर रहा। 
  • जीरो हंगर इंडेक्स के साथ झारखण्ड 19/100 अंक के साथ आखिरी स्थान पर था। 
  • उद्योग, नवाचार (innovation), बुनियादी ढांचे में भी झारखण्ड 37/100 अंक के साथ आखिरी पायदान पर रहा। 
  • जलवायु परिवर्तन में भी झारखण्ड 25 /100 अंक के साथ सेकंड लास्ट स्थान पर रहा। 

साल 2015-16 में राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार झारखण्ड का विकास दर (-6.2%) रहा वहीं,

2016-19 के दौरान औसत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) सिर्फ 5.7 % था। 

झारखण्ड के औद्योगिक क्षेत्र का विकास दर 2011-19 में औसत 3.3% रहा जबकि  टैक्स कलेक्शन में भी 7% की गिरावट दर्ज  की गयी है। 

साथ ही झारखण्ड की रैंक प्रति व्यक्ति आय में भी अंतिम चौथे स्थान पर रहा जिस कारण ही झारखण्ड सबसे गरीब राज्यों में गिना जाता है। 

तेंदुलकर कमेटी के अनुसार झारखण्ड की 37% आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहने को मजबूर है  राष्ट्रीय औसत 22% से ज्यादा है। 

झारखण्ड का शहरी आबादी का कुल 40% और ग्रामीण आबादी का 25% गरीबी रेखा के निचे है। 

झारखण्ड को “जंगल की भूमि” भी कहा जाता है पर नेशनल फॉरेस्ट पॉलिसी के अनुसार आज झारखण्ड के कुल क्षेत्रफल का सिर्फ 29% में ही जंगल बचा है जो की राष्ट्रीय औसत 33% से भी कम है।  

Why is Jharkhand Backward? hindi me

Exploitation of Minerals of Jharkhand hindi me

झारखंड के खनिजों का दोहन

झारखंड में कोयला खनन की शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा 1774 ई में हुआ। 

कंपनी ने यहां शुरुआत में 6 मिलियन टन कोयला का उत्पादन किया था जो बाद में 1920 आते आते 18 मिलों टन तक हो गया। 

झारखण्ड में इतने मात्रा में कोयला का उत्पादन पूरी दुनिया से अधिक था। 

इसने अंग्रेज़ों के औद्योगिक क्रांति को एक नयी दिशा प्रदान किया।

झारखण्ड के कोयले का ही परिणाम था की दुनिया ने अनेको अविष्कार किये जिसमे भांप से चलने वाली स्टीम इंजन एक प्रमुख उदाहरण है। 

प्रथम और दूसरे विश्व युद्ध में भी झारखण्ड का कोयला ही था जिसका सहायता से कई देशों ने जंग लड़ा। 

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान कोयले की खपत बढ़ गयी थी और इसके साथ ही कोयले का खनन भी बढ़ा। 

इस दौरान 33 मिलियन मीट्रिक टन कोयले का खनन हुआ था। 

भारतीयों ने कोयले के खनन में अंग्रेजों का एकाधिकार को सन 1894 ई में चुनौती दी जब सेठ रामजी ने झरिया में कोयले का खनन की शुरुआत की। 

Measures by the government to stop the exploitation of minerals hindi me

खनिजों के दोहन को रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाये गए कदम उपाय

भारत की आज़ादी के बाद भारत सरकार ने पांच वर्षीय योजना के तहत कई योजना बनाए जिससे यहाँ के कोयला और अन्य खनिज पदार्थ को बल मिला। 

पहले पांच वर्षीय योजना के तहत भारत सरकार द्वारा गठित National Coal Development Corporation की मदद से झारखंड में कोयला का 33 मिलियन टन खनन किया गया। 

सन 1971-72 ई में The Coal Mines Act of 1972 और 1973 के तहत इंदिरा गांधी सरकार ने कोकिंग कोल् माइंस और नॉन-कोकिंग कोल् माइंस का राष्ट्रीयकरण कर दिया।

इस कानून के तहत अब सिर्फ भारत सरकार की अधिग्रहण वाली कंपनी जैसे Coal India  ही कोयले का खनन कर सकती थी। 

साल 2018 में मोदी सरकार ने इस कानून में बदलाव कर दिया और अब निजी कंपनी भी कोयले का खनन कर सकती हैं। 

Why is Jharkhand Poor: Current Problems hindi me

झारखण्ड की वर्तमान समस्याएं

राजनीतिक अस्थिरता

झारखण्ड राज्य के बनने के 20 साल में 10 से ज्यादा बार मुख्यमंत्री बदल चुके हैं । 

इस राजनीतिक अस्थिरता  के कारण झारखण्ड के खनिज पदार्थों का दहन हुआ। 

सत्ताधारी लोगों ने टेंडर लीज के बहाने पैसा तो कमाया पर यहाँ के आम लोगो इनाम के तौर पर सिर्फ विस्थापन मिला। 

बाकि रही सही कसर राज्य सरकारों की कमजोर नीतियां, और नक्सल-उग्रवादी संगठनों ने उतर ली। 

राज्य सरकार के संरक्षण में कुछ ठेकेदार विकास के नाम पर जंगलों का दोहन करते हैं और वहां रह रहे लोगों को जबरन विस्थापन करवा दिया जाता है। 

झारखण्ड के पिछड़ेपन में सबसे बढ़ा कारण आर्थिक अभाव भी है जिसे यहाँ लोगों ने झेला है। 

यहाँ के कई ज़िलों में जहाँ खनिज़ पदार्थों का भंडार है वहीँ बहुत ऐसे भी ज़िला हैं जहाँ भुखमरी और बेरोज़गारी ही दिखती है। 

टेनेंसी लॉ

अंरेज़ों द्वारा बनाये गए छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट (CNT) और संथाल परगना टेनेंसी (SPT) भी झारखण्ड के विकास में एक बड़ा अवरोधक साबित हुआ है।

यह एक्ट ज़मीन और प्रॉपर्टी पर विशेष अधिकार प्रदान करते हैं। 

इसके अलावा बेहतर शिक्षा, कुपोषण, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं का बुनियादी आभाव भी झारखण्ड के पिछड़ेपन का एक अहम् कारण है। 

Solutions to the challenges of Jharkhand hindi me

झारखण्ड की समस्याओं का समाधान

झारखण्ड के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सरकारों ने कई कदम उठाए है –

  1. साहेबगंज पुल परियोजना
    • साल 2017 में झारखण्ड सरकार ने गंगा नदी पर लगभग 22 KM लम्बा पुल निर्माण को मंज़ूरी दिया है। 
    • यह पुल गंगा नदी पर बना अब तक का सबसे लम्बा पुल में से एक होगा।
    • यह पुल झारखण्ड बिहार को जोड़ेगा।  
  1. साहिबगंज मल्टीमॉडल टर्मिनल
    • भारत सर्कार ने साल 2019 में बनारस, साहिबगंज और हल्दिया बन्दरगाह को जोड़ते हुए एक मल्टीमॉडल टर्मिनल का निर्माण कराया है जो देश का दूसरा सबसे बड़ा मल्टीमॉडल टर्मिनल है। 
    • इस मल्टीमॉडल टर्मिनल के इस्तेमाल से झारखण्ड समुद्री  मार्ग से विश्व  के अन्य हिस्से से आयात-निर्यात कर सकता है।
    • इससे झारखण्ड के लोगों के लिए नए अवसर का सृजन हुआ है 
  2. रांची हज़ारीबाग़ पटना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर
    • साल 2015 में बना यह कॉरिडोर रांची हज़ारीबाग़ और पटना को जोड़ता है जो आगे बढ़ कर Golden Quadrilateral से NH 2 (दिल्ली – कोलकाता लिंक )और NH 6 (कोलकाता – मुम्बई लिंक) के ज़रिये जुड़ता  है।  
  3. SAAMAR (Strategic Action for Alleviation of Malnutrition and Anemia Reduction)
    • झारखंड सरकार ने राज्य में कुपोषण और एनीमिया के उन्मूलन के लिए अभियान शुरू करने की घोषणा की। 
    • अभियान का उद्देश्य एनीमिया से पीड़ित महिलाओं और कुपोषित बच्चों की पहचान करना और विभिन्न विभागों को राज्य में समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एकजुट करना है जहां कुपोषण एक बड़ी समस्या है। 
    • मार्च 2017 आर्थिक सर्वेक्षण के दौरान राज्य में किए गए व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण के  आंकड़ों के आधार पर, पांच साल से कम उम्र के 36 फीसदी लोग अविकसित हैं, 29 फीसदी वेस्टिंग से प्रभावित हैं और 45% कम वजन वाले हैं जो कुपोषण की स्थिति को दर्शाता है।
  4. STEM:
    • झारखण्ड एजुकेशन प्रोजेक्ट कौंसिल (JEPC) द्वारा STEM (Science, Technology , Engineering और Mathematics) चार विशिष्ट विषयों यानी विज्ञान और प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित में एक अंतःविषय और व्यावहारिक दृष्टिकोण के माध्यम से छात्रों को शिक्षित करने के विचार पर आधारित एक पाठ्यक्रम है। 
    • चार विषयों को एक अलग मॉड्यूल के रूप में पढ़ाने के बजाय, STEM उन्हें वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों के आधार पर एक समेकित शिक्षण प्रतिमान में एकीकृत करता है।
    • इस पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्रों में आलोचनात्मक और विश्लेषणात्मक सोच विकसित की जाएगी। 
  5. छात्रवृद्धि योजना
    • मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृद्धि योजना (MMCY) और मुख्यमंत्री विजयलक्ष्मी उच्च शिक्षा प्रोत्साहन (MVUSP) योजना के तहत राज्य के मेधावी छात्रों को प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर छात्रवृद्धि दी जाएगी। 
  6. कृषि 
    • कृषि क्षेत्र के विकास लिए भी सरकार ने कई कदम उठाये हैं। जैसे 
    • झारखण्ड राज्य फसल राहत योजना :
      • यह एक मुआवजा योजना है जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा के कारण फसल क्षति के मामले में झारखंड के किसानों को सुरक्षा कवच प्रदान करना है। 
      • इसमें भूमि मालिक और भूमिहीन किसान दोनों शामिल होंगे। 
      • कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग कार्यान्वयन एजेंसी होगी और यह एक परियोजना प्रबंधन इकाई के सहयोग से काम करेगी, जो एक परामर्श फर्म होगी जो तकनीकी आवश्यकताओं का ध्यान रखेगी। 
      • “खाद्य सुरक्षा, फसल विविधीकरण, कृषि में तेजी से विकास और प्रतिस्पर्धा का मार्ग प्रशस्त करना,” योजना के उद्देश्यों में से हैं। 
      • यह कोई बीमा योजना नहीं है जिसमें प्रीमियम का भुगतान किया जाता है।
    • कृषि ऋण माफ़ी योजना
      • कर्जमाफी योजना से राज्य के 8 लाख किसानों को राहत मिलेगी।
      • साथ ही 1.24 लाख किसानों के 50 हजार रुपये माफ किए जाएंगे।
      • प्रत्येक किसान के लिए, कैपिंग 50,000 रुपये है।
      • राशि का भुगतान सरकार द्वारा उनके संबंधित बैंकों को किया जाएगा।
      • भूस्वामी और भूमिहीन किसान दोनों पात्र होंगे।
      • चुकौती अवधि के दौरान किसान को कम से कम एक बार किश्त चुकानी होगी।
  7. निवेश योजना 
    • Jharkhand industrial and investment promotion policy 2021  के तहत झारखण्ड सरकार राज्य में नए निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। 
    • स्पेशल इकनोमिक जोन और इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी: इसके तहत राज्य सरकार बुनियादी औद्योगिक ढांचा तैयार कर रही है जिससे राज्य की उद्योग को बढ़ावा मिल सके। 
      • स्पेशल इकनोमिक जोन के तहत राज्य सरकार ने आदित्यपुर में ऑटोमोबाइल कंपनी और गोड्डा में अडानी पावर को ज़मीन हस्तांतरित कर दिया है। 
      • इसके अलावा झारखण्ड एनर्जी पालिसी 2012, जिलेवार स्किल मैपिंग, स्टेट टूरिज्म पॉलिसी 2020, domicile पॉलिसी पर काम कर रही है। 

Conclusion hindi me

इन सब के अलावा झारखंड में ऐसे और क्षेत्र है जहां सरकार को  ध्यान देना काफी जरूरी है जैसे :

शिक्षा

झारखण्ड आज भी क्वालिटी एजुकेशन, शिक्षकों की कमी और स्किल्ड वर्कफोर्स के लिए जूझ रहा है।

सरकारी विद्यालयों में मुलभुत सुविधाओं के कारण विधालयों का ड्राप रेट बढ़ा है। 

चिकित्सा

चिकित्सा  के क्षेत्र में झारखंड में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। 

झारखंड के पंचायतों को भी जमीनी स्तर पर सशक्त करने की जरूरत है जिससे की ग्रामीणों के समस्याओं का समाधान हो सके।  

झारखण्ड में जहाँ एक ओर काफी समृद्ध औद्योगिक ज़िलें है वहीँ कुछ ज़िलें अब भी पिछड़े हुए है।

इन ज़िलों में अब भी सड़क बिजली और पानी की मुलभुत सुबिधाएँ नहीं है। 

इस दूर करने के लिए के लिए आसान ज़मीन अधिग्रहण पालिसी लेकर सरकार पिछड़े ज़िलों को भी सशक्त बना सकती है। 

झारखण्ड खेल के क्षेत्र में भी एक अग्रणी राज्य है जिसने महेंद्र सिंह धोनी , जयपाल सिंह , दीपिका कुमारी जैसे खिलाड़ी देश को दिए है। 

अंत में झारखंड भारत का एक ऐसा राज्य है जिसकी क्षमता को अगर अच्छे से इस्तेमाल किया जाए तो इसे दुनिया का मिनरल सिटी बनते देखा जा सकता है। 

References:

Mpra

World Bank

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