Top 20 Best facts: Hazaribagh-Ramgarh Dynasty in Hindi.

Hello Aspirants, Jharkhand Gk in Hindi की इस Article में हम आपको  Top 20 facts about Hazaribagh-Ramgarh Dynasty in Hindi में विस्तार से बताएँगे।

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Hazaribagh-Ramgarh dynasty Introduction

हज़ारीबाग़ राज्य के अंतर्गत पांच प्रमुख राजवंश थे – खरगडीहा , छै , रामगढ, कुंडा और केन्दी। 

इन सभी राजवंशों में रामगढ सबसे समृद्ध और बड़ा राजवंश था। 

Hazaribagh-Ramgarh dynasty – अकबर काल (1556 – 1605 ई.)

हज़ारीबाग़ का सवप्रथम बाहरी शक्तियों से सम्पर्क अकबर के काल में हुआ जब राजा मान सिंह अपने मिदनापुर (बंगाल )जाने के क्रम में  मानभूम  एवं  हज़ारीबाग़ क्षेत्र से गुजरा। 

राजा मान सिंह ने परा तथा तेलकुप्पी में मंदिर तथा पंचेत राज्य में एक किला का निर्माण करवाया।

अबू फज़ल की आईने-अकबरी  से ज्ञात होता है की छै और चंपा  को बिहार सूबा में शामिल किया गया था। 

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जहांगीर काल (1605 – 1627 ई.)

कोई विशेष जानकारी उपलभ्द नहीं है। 

शाहजहां काल (1628 – 1658 ई.)

इस काल में हज़ारीबाग़ के रामगढ क्षेत्र में मुग़लों का हस्तक्षेप काफी बढ़ गया हालाँकि रामगढ अभी भी स्वतंत्र था। 

औरंज़ेब काल (1658 – 1707 ई.)

इस काल में हज़ारीबाग़ में एक नए राज्य कुंडा की स्थापना औरंज़ेब का एक पदाधिकारी और राम सिंह ने की। 

Hazaribagh-Ramgarh dynasty

1667 में दलेल सिंह रामगढ राज्य का शासक बना और 1670 में राजधानी बादम से बदल कर रामगढ को बनाया।

राजधानी परिवर्तन का कारण रामगढ सामरिक दृस्टि से अधिक सुरक्षित था और बादम मुस्लमान आक्रमणकारियों के मार्ग में पड़ता था। 

रामगढ़ राज्य का इतिहास पढ़े- History of Jharkhand – Regional dynasties

उत्तर मुग़ल काल (1707 – 1767 ई.)

रामगढ के राजधानी बनने के बाद दलेल सिंह ने छै राज्य (राजा मगर सिंह) पर अधिकार कर लिया और अपने राज्य का विस्तार कर रामगढ को समृद्ध बनाया। 

परन्तु छै राज्य पर इनका ज्यादा समय तक अधिकार नहीं रहा और मगर सिंह का पुत्र रनभस्त खान ने दलेल सिंह को हरा कर अपना राज्य पुनः जीत लिया। 

दलेल सिंह के बाद इनका पुत्र विष्णु सिंह रामगढ का राजा बना। इसने छै राज्य पर पुनः अधिकार कर लिया। 

हालाँकि इस काल खंड में रामगढ पर कई आक्रमण भी हुए। 

1740 में बंगाल का नवाब अलीवर्दी खान और 1763 में मीर कासिम ने रामगढ से कर वसूली के नाम पर आक्रमण किये। 

1747 में रामगढ पर मराठों का आक्रमण भास्कर राव के नेतृत्व में हुआ। 

1751 में नरहत समया के जमींदार ने आक्रमण किया। 

इन आक्रमणों ने रामगढ राज्य को कमजोर कर दिया और रामगढ मुग़लों के अधीन हो गया। 

विष्णु सिंह की मृत्यु के बाद उसका भाई मुकुंद सिंह रामगढ का राजा बना और छै राज्य को पूरणतः रामगढ राज्य में मिला लिया। 

 अंग्रेज काल (1767 – 1837 ई.)

रामगढ राजा – मुकुंद सिंह। 

रामगढ के राजा मुकुंद सिंह ने अंग्रेजों का पुरजोर विरोध किया और इनकी अधीनता को अस्वीकार्य कर दिया। 

तब रामगढ को अपने अधीन लाने के लिए कंपनी ने विशेष रणनीति अपनायी।

कंपनी ने मुकुंद सिंह के एक सम्बन्धी तेज सिंह को रामगढ की राजगद्दी का असली हकदार घोषित कर दिया और राजगद्दी को खाली करने का फरमान सुनाया। 

मुकुंद सिंह ने ये फरमान ठुकरा दिया और 1772 में कैप्टेन कैमक की अगुवाई में युद्ध शुरू होती है पर मुकुंद सिंह हार जाते है। 

मुकुंद सिंह को बंदी बना लिया जाता है और तेज सिंह की ताजपोशी कर सालाना कर तय कर दी जाती है। 

अपने राजा को अपदस्त कर दिए जाने के बाद रामगढ में विद्रोह शुरू हो जाती है जिसे घटवाल विद्रोह कहा जाता है।

1773 में रामगढ, पलामू और छोटानागपुर खास को मिला कर संयुक्त रूप से रामगढ राज्य बना दिया जाता है। 

1937 ई. में कामाख्या नारायण सिंह रामगढ़ का राजा बनते  है। 
देश आज़ाद होने के बाद , 26 जनवरी, 1955 को बिहार राज्य भमि सुधार अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत —

रामगढ़ राज्य का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया और इसे भारतीय संघ (Union of India) में शामिल कर लिया गया।

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Dear AspirantsJharkhand GK in Hindi series में हमने Hazaribagh-Ramgarh dynasty के बारे में discuss किया।

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