3 Dinosaur footprints in Rajasthan I पूरी जानकारी हिंदी में

राजस्थान के थार रेगिस्तान में मिले डायनासोर के पैरों के निशान

About Dinosaur footprints in Rajasthan: राजस्थान के थार रेगिस्तान में डायनासोर की तीन प्रजातियों के पैरों के निशान मिले हैं।

यह इस क्षेत्र में 200 मिलियन वर्ष पहले डायनासोर के अस्तित्व को साबित करता है।

Dinosaur footprints in Rajasthan पैरों के निशान मुख्य रूप से राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्र में पाए गए हैं।

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Dinosaur footprints in Rajasthan is of Mesozoic Era.

राजस्थान में डायनासोर के पैरों के निशान मेसोजोइक युग के हैं।

लगभग 200 मिलियन वर्ष पूर्व मेसोज़ोइक युग के दौरान जैसलमेर, बाडमेर ने टेथिस सागर में भारतीय उपमहाद्वीप की समुद्री पश्चिमी सीमा का निर्माण किया।

About Dinosaur Era डायनासोर युग

Paleozoic Era

What is the Paleozoic Era known for? पैलियोजोइक युग किसके लिए जाना जाता है?

Paleozoic Era पैलियोजोइक युग, जो लगभग 540 मिलियन वर्ष पूर्व से 250  मिलियन वर्ष पूर्व तक चला, पृथ्वी पर बड़ा परिवर्तन लेकर आया। 

पैलियोजोइक युग युग की शुरुआत एक महाद्वीप के टूटने और दूसरे महाद्वीप के बनने से हुई। पेड़- पौधे और जानवरों का उदभव हुआ। 

पैलियोजोइक युग Paleozoic Era को कैम्ब्रियन, ऑर्डोविशियन, सिलुरियन, डेवोनियन और कार्बोनिफेरस काल में विभाजित किया गया है, जिनमें से प्रत्येक में जीवाश्मों के अलग-अलग समूह हैं।

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img credit: the Hindu

Mesozoic Era

What is the Mesozoic era known as? मेसोजोइक युग को किस नाम से जाना जाता है?

मेसोज़ोइक, या “मध्य जीवन” युग के दौरान, जीवन तेजी से विविध हुआ और विशाल सरीसृप, डायनासोर और अन्य राक्षसी जानवर पृथ्वी पर घूमने लगे।

लगभग 250 मिलियन वर्ष पूर्व से लगभग 66 मिलियन वर्ष पूर्व की अवधि को सरीसृपों आयु या डायनासोर आयु के रूप में भी जाना जाता था।

वैज्ञानिक मेसोज़ोइक युग को तीन अवधियों में विभाजित करते हैं: ट्राइसिक, जुरासिक और क्रेटेशियस। 

 युग का अंत पृथ्वी पर बड़े पैमाने पर उल्कापिंड के गिरने से हुआ। 

उल्कापिंड के प्रभाव डायनासोर के विलुप्त होने का कारण बना और पृथ्वी पर 80% तक जीवन को मिटा दिया।

Cenozoic Era

What is the Cenozoic era best known for? सेनोजोइक युग किसके लिए जाना जाता है?

सेनोज़ोइक (65 मिलियन वर्ष पहले से आज तक) का अर्थ है ‘हाल का जीवन। ‘ इस युग के दौरान, पेड़-पौधे और जानवर आज पृथ्वी पर पाएं जाने वाले पेड़-पौधे और जानवर के समान दिखते थे। 

सेनोज़ोइक युग, जिसे स्तनधारि आयु के रूप में भी जाना जाता है, का विकास इसी युग हुआ। इनके विकास कारण था की अब विशाल स्तनधारियों के कई समूह पृथ्वी से विलुप्त हो चुके थे और उनके शिकारी अब मौजूद नहीं थे।

How Dinosaur footprints in Rajasthan formed? राजस्थान में डायनासोर के पदचिह्न कैसे बने?

समुद्र तट के तलछट या गाद में बने पैरों के निशान बाद में स्थायी रूप से पत्थर जैसे हो जाते हैं।

ग्रेलर टेन्यूस फुटप्रिंट की कुछ विशेषताएं जिनमें संकीर्ण पैर की उंगलियां और लंबे पंजे शामिल हैं।

डायनासोर की प्रजाति को थेरोपोड प्रकार का माना जाता है, जिसमें खोखली हड्डियों और पैरों की विशिष्ट विशेषताएं होती हैं। तीनों प्रजातियाँ प्रारंभिक जुरासिक काल की हैं।

About the Dinosaur footprints in india?

भारत में पाए गए डायनासोर के पैरों के निशान के बारे में

भारत में पाए गए डायनासोर के पैरों के निशान, डायनासोर की तीन प्रजातियों से संबंधित हैं-

  1. Eubrontes giganteus
  2. Eubrontes glenrosensis
  3. Grallator tenuis.

Eubrontes Giganteus प्रजातियों के बारे में

Eubrontes, लेट ट्राइसिक और पूर्व जुरासिक युग के दौरान पाए गए जीवाश्म डायनासोर के पैरों के निशान का नाम है।

लम्बाई 12-15 मीटर लंबा और वजन लगभग 500-700 kg होता था। 

पहले इनकी पहचान चेक गणराज्य, अमेरिका, फ्रांस, पोलैंड, इटली, स्पेन, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया और अब भारत से हुई है।

Grallator tenuis के बारे में

ग्रेलेटर टेनुइस ग्रेलेटर पैरों के निशान विशेष रूप से तीन-पैर वाले डायनासोर होते हैं और 10 से 20 सेंटीमीटर (4 से 8 इंच) लंबे होते हैं।

जबकि गिगेंटस और ग्लेनोरोसेंसिस प्रजातियों में 35 सेमी पैरों के निशान होते हैं,

 भारत में मिले Grallator प्रजातियों के पैरों के निशान 5.5 सेमी पाए गए हैं।

Dinosaur footprints in Rajasthan What’s Next !!

Dinosaur footprints in Rajasthan: यह राजस्थान में डायनासोर के अवशेषों की खोज की शुरुआत भर है।

निकट भविष्य में विशेष रूप से जैसलमेर और बाड़मेर जैसे क्षेत्रों से और अधिक डायनासोर के जीवाश्म मिलने की उम्मीद है।

इससे पहले शोधकर्ताओं ने मेघालय में पश्चिम खासी हिल्स जिले के आसपास के क्षेत्र से लगभग 100 मिलियन वर्ष पहले के सॉरोपोड्स नामक लंबी गर्दन वाले डायनासोर के जीवाश्म हड्डी के टुकड़ों की पहचान की थी।

यह खोज गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद मेघालय को भारत का पांचवां राज्य बनाती है, जिसने टाइटेनोसॉरियन के साथ सॉरोपॉड हड्डियों की जानकारी मिली है।

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