States of Matter in Hindi – पदार्थ की प्रकृति – हिंदी में!!

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Hello Aspirants, इस General Chemistry in Hindi Notes series में, हम General Chemistry के एक महत्वपूर्ण अध्याय पर चर्चा करने जा रहे हैं – States of Matter in Hindi or Matter-States – पदार्थ की प्रकृति । यह रसायन विज्ञान नोट्स उन उम्मीदवारों के लिए बहुत उपयोगी होंगे जो सरकारी नौकरी जैसे SSC-CGL, SSC-CHSL, JPSC, JSSC-CGL और अन्य परीक्षा जैसे प्रतियोगी परीक्षाएं की तैयारी कर रहे हैं।

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States of Matter in Hindi – Introduction

रसायन विज्ञान – विज्ञान की वह शाखा जिसमें वस्तुओं के गुण, संघटन और संरचना का अध्ययन किया जाता है । केमिस्ट्री शब्द की उत्पत्ति मिस्र के प्राचीन नाम कीमिया से हुई है जिसका अर्थ है – काला रंग। लेवोसिए (Lavosier) को रसायन विज्ञान का जनक माना जाता है।

States of Matter in Hindi – रसायन विज्ञान की शाखाएँ

रसायन विज्ञान को निम्नलिखित शाखाओं में विभाजित किया गया है –
1. अकार्बनिक रसायन विज्ञान : इसमें तत्व, उनकी प्रकृति और उनसे बनने वाले यौगिकों का अध्ययन किया जाता है।
2. भौतिक रसायन विज्ञान: इसमें मौलित अभिक्रियाओं के नियमों तथा सिद्धान्तों अध्ययन किया जाता है।
3. कार्बनिक रसायन विज्ञान : इसमें कार्बन उसके यौगिकों का अध्ययन किया जाता है।
4. जैव रसायन विज्ञान : यह जीवन प्रणाली में अंतर्निहित रासायनिक परिवर्तन के अध्ययन से संबंधित है।
5. विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान : इसमें पदार्थों की पहचान तथा उनकी मात्रा निर्धारित करने का अध्ययन किया जाता है।
6. नाभिकीय रसायन विज्ञान : इसमें नाभिकीय क्रियाओं, रेडियो सक्रिय तत्व और इनकेउपयोगों का अध्ययन किया जाता है।

 States of Matter in Hindi – पदार्थ (Matter)

पदार्थ (Matter) : वे सभी वस्तुएँ जो स्थान घेरती हों तथा जिनमें द्रव्यमान हो उन्हें पदार्थ कहा जाता है। जैसे लोहा, खनिज पत्थर, ऑक्सीजन, जल, हवा आदि।
पदार्थ-अवस्थाएँ पाँच चरणों में मौजूद हैं – जैसे, ठोस, तरल, गैस, प्लाज्मा, बोस-आइंस्टीन घनीभूत। जिसमें से आमतौर पर पूर्व के तीन मैटर-स्टेट्स (States of Matter) देखे जाते हैं।

ठोस (Solid)

इनकी निश्चित मात्रा और आकार होती है। वे असंगत होते हैं और इनका सबसे मजबूत अंतर आणविक बल होता हैं। वे तरल और गैस की तुलना में बहुत घने हैं। जैसे, लकड़ी, पत्थर, लोहा आदि।
गलनांक (मेल्टिंग पॉइंट) – यह एक तापमान है जिस पर कोई पदार्थ अपनी ठोस अवस्था से तरल अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। बर्फ का गलनांक 0 ° C होता है। अशुद्धता की उपस्थिति में गलनांक घटता है।

तरल पदार्थ (Liquid)

ऐसी पदार्थ जिनके पास एक विशेष मात्रा तो होती है लेकिन कोई निश्चित आकार नहीं होता । वे उस बर्तन का आकार लेते हैं जिसमें उन्हें रखा जाता है। वे प्रवाहित हो सकते हैं जिन्हें तरल माना जाता है। जैसे, दूध, पानी, पारा आदि।

क्वथनांक (Boiling Point) : यह एक तापमान है जिस पर तरल का वाष्प दाब वायुमंडलीय दबाव के बराबर हो जाता है। यह अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग है।

सामान्य परिस्थितियों में पानी का क्वथनांक 100 ° C होता है। यह आमतौर पर उच्च ऊंचाई पर कम हो जाता है यही कारण है कि उच्च ऊंचाई पर, पानी का क्वथनांक 100 डिग्री सेल्सियस से कम है और भोजन पकाने के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है।

प्रेशर कुकर में पानी का क्वथनांक उच्च दबाव के कारण अधिक होता है और इसलिए भोजन पकाने के लिए कम समय की आवश्यकता होती है। “अशुद्धता की उपस्थिति में क्वथनांक बढ़ता है।”

वाष्पीकरण (Evaporation) – यह अपने क्वथनांक के नीचे किसी भी तापमान पर वाष्प में तरल के रूपांतरण की प्रक्रिया है। यह सतह क्षेत्र और तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ता है।

यह शीतलन पैदा करता है। इसीलिए जब हमारी हथेली पर कुछ नेल इनेमल रिमूवर या स्पिरिट रखा जाता है तो हमें ठंडक महसूस होती है। इसी तरह, मिट्टी के बर्तन, मटका, ग्रीष्मकाल के दौरान ठंडा हो जाता है।

वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले कारक: वाष्पीकरण में वृद्धि / कमी की दर निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है-

(i) सतह क्षेत्र में वृद्धि – वाष्पीकरण की दर को बढ़ाती है। जैसे- कपड़े तेजी से सूखने के लिए फैलते हैं।
(ii) तापमान में वृद्धि – कणों की गतिज ऊर्जा को बढ़ाता है।
(iii) आर्द्रता में कमी – वाष्पीकरण की दर को बढ़ाती है।
(iv) हवा की गति – हवा की गति में वृद्धि जल वाष्प कणों को दूर करती है, इस प्रकार वाष्पीकरण की दर को बढ़ाती है।

Q. बर्फ के ठंडे पानी वाले गिलास की बाहरी सतह पर पानी की बूंदें क्यों बनती हैं?

उत्तर- इस ठंडे पानी के संपर्क में आने पर वातावरण में मौजूद पानी की बूंदे, यह ऊर्जा (गतिज ऊर्जा) खो देती है और ठंडी हो जाती है और तरल अवस्था में परिवर्तित हो जाती है।

गैस (Gas)

उनके पास न तो कोई विशेष आयतन है और न ही कोई विशेष आकार। वे उस कंटेनर के आकार और मात्रा को लेते हैं जिसमें वे भरे हुए हैं। वे अत्यधिक संकुचित होते  हैं। इन्हे  प्रवाह को तरल पदार्थ के रूप में माना जा सकता है।

संघनन (Condensation) – यह द्रव में गैस के रूपांतरण की प्रक्रिया है। तापमान और दबाव की स्थितियों को बदलकर ठोस, तरल और गैसें परस्पर जुड़ी होती हैं।

प्लाज्मा (Plasma)

पदार्थ की चौथी अवस्था को प्लाज्मा कहा जाता है। इस अवस्था में सुपर ऊर्जावान और सुपर उत्साहित कणों के साथ आयनित गैस होती है।
फ्लोरोसेंट ट्यूब (हीलियम (He) गैस) और नियोन साइन बल्ब (नियॉन (Ne ) गैस) में प्लाज्मा होता है। जब विद्युत ऊर्जा उनके माध्यम से गुजरती है, तो गैस चार्ज हो जाती है (आयनित) और ट्यूब / बल्ब के अंदर प्लाज्मा चमकने लगता है। प्लाज्मा का रंग बल्ब / ट्यूब के अंदर मौजूद गैस की प्रकृति पर निर्भर करता है।
प्लाज्मा ही तारों (सूर्य और अन्य तारों) को उनके अंदर मौजूद उच्च तापमान के कारण चमकने का कारण बनता है।

बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट (Bose-Einstein Condensate.)

1924-25 में, सत्येंद्र नाथ बोस और अल्बर्ट आइंस्टीन ने बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट के बारे में जानकारी दी।
यह एक कम घनत्व वाले गैस की स्थिति है, जो एक तापमान तक ठंडा होता है जो पूर्ण शून्य या -273.15 डिग्री सेल्सियस के करीब होता है। वास्तव में, यह पदार्थ का पांचवीं अवस्था है।

States of Matter in Hindi – पदार्थ के प्रकार

पदार्थ को तीन प्रकार में विभाजित किया  जाता है –
(i) तत्व (Element) (ii) यौगिक (Compound) (iii) मिश्रण (Mixture)

 States of Matter in Hindi – तत्व (Element)

तत्व शब्द पहली बार 1661 में रॉबर्ट बॉयल द्वारा गढ़ा गया था। एंटोनी लावोइज़र के अनुसार,“तत्व पदार्थ का मूल रूप है जिसे किसी भी रासायनिक प्रतिक्रिया से सरल पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता है।”
तत्व वह शुद्ध पदार्थ है, जिसे पदार्थ के किसी अन्य रूप में विभाजित नहीं किया जा सकता है। दो या दो से अधिक पदार्थों के बीच संयोग कराकर तत्व का संश्लेषण नहीं किया जा सकता है।
तत्व दो प्रकार के होते हैं –
(i) धातु (Metal) (ii) अधातु (Non metal)

(i) धातु (Metal) – धातु, विद्युत और ऊष्मा के सुचालक होते हैं। धातुओं में एक चमक (lustre) होती है। जैसे – लोहा, ताँबा, चाँदी, सोना आदि।
(ii) अधातु (Non metal) – अधातु विद्युत और ऊष्मा के कुचालक होते हैं। जैसे- ऑक्सीजन, ब्रोमीन, कार्बन आदि।पारा तथा ब्रोमीन भी एक तत्व है जो द्रव के रूप में पाए जाते हैं।

 States of Matter in Hindi – यौगिक (Compound)

यौगिक वह शुद्ध पदार्थ है जो दो या अधिक तत्वों के भार के मिलने से, एक निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोग के फलस्वरूप बनता है। जैसे- जल (यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के संयोग से बनता है)।

यौगिक (Compound) के गुण :

i. यौगिक के अवयवी तत्वों को किसी यांत्रिक या भौतिक विधि द्वारा अलग नहीं किया जा सकता है।
ii. यौगिक के गुण अवयवी तत्वों के गुणों से भिन्न होते हैं। जैसे जल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना होता है। परन्तु जल के गुण उनके अवयवों जैसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से भिन्न होता है।

States of Matter in Hindi – मिश्रण (Mixture)

मिश्रण वह पदार्थ है जो दो या अधिक तत्वों या यौगिकों के किसी भी अनुपात में मिलने से बनता है और जिसे सरल यांत्रिक विधियों द्वारा अवयवों में अलग किया जा सकता है।

मिश्रण दो प्रकार के होते हैं-

संमागी (Homogenous) : इसमें घटकों का संघटन हर जगह समान रहता है, और मिश्रण एक ही प्रावस्था में रहता है। जैसे – ठोस, तरल या गैस।

विषंमागी (Heterogenous): इसमें विभिन्न घटकों का संघटन हर जगह समान नहीं होता है तथा मिश्रण अलग-अलग प्रावस्थाओं में रहता है।

मिश्रण (Mixture) के गुण :

मिश्रण विषंमागी होता है। मिश्रण में उनके अवयवों का कोई निश्चित अनपात नहीं होता, वे किसी भी अनुपात में मौजूद रहते हैं। मिश्रण में उसके अवयव अपना अलग-अलग गुण कायम रखते हैं।

मिश्रण के प्रकार

1. जल में विलेय दो ठोस पदार्थों का मिश्रण।

2. एक अविलेय ठोस पदार्थ और एक विलेय ठोस पदार्थ का मिश्रण।

3. जल में अविलेय दो ठोस पदार्थों का मिश्रण।

4. द्रव में एक ठोस पदार्थ का मिश्रण।

5. दो द्रवों का मिश्रण।

मिश्रण का पृथक्करण

ऊर्ध्वपातन (Sublimation) : इस प्रक्रिया में ठोस पदार्थ गर्म करने पर सीधा गैसीय अवस्था में रूपान्तरित हो जाता है, जो कि ठंडा होने पर पुनः अपनी प्रारंभिक ठोसावस्था में आ जाता है। इस विधि द्वारा ऊर्ध्वपाती एवं अनुर्ध्वपाती पदार्थों को अलग किया जाता है।

उदाहरण : नेप्थलीन, आयोडीन, कपूर, अमोनियम क्लोराइड आदि।

रवाकरण (Crystallization) : इस विधि द्वारा रवेदार ठोस पदार्थ के घोल को गर्म करके छान लिया जाता है, जिसके बाद घोल को धीरे-धीरे ठंडा करने पर रवेदार ठोस पदार्थ रवा के रूप में अलग हो जाता है।

जैसे – CuS4 . 5H2O (Copper Sulfate) को उसके घोल से अलग करना।

आसवन (Distillation) : किसी द्रव को उसके वाष्प में बदलकर उसे ठंडा कर पुनः द्रव अवस्था में लाने की प्रक्रिया को आसवन कहा जाता है। इससे साधारण जल को आसुत जल बनाया जाता है।

प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation): भिन्न क्वथनांक वाले दो या दो से अधिक वाष्पशील द्रवों को पृथक करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है। जैसे – पेट्रोलियम से पेट्रोल, डीजल, किरोसीन आदि का पृथक्करण।

वर्णलेखन (Chromatography): इस विधि का उपयोग उन विलेय पदार्थों को पृथक करने में किया जाता है जो एक ही तरह के विलायक में घुले होते हैं। जैसे- डाई में रंगों को पृथक करना, रक्त से नशीले पदार्थों को पृथक करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है ।

States of Matter in Hindi – अणु (Molecule)

किसी पदार्थ (तत्व या यौगिक) का वह सूक्ष्मतम कण जो स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है, अणु कहलाता है। यह दो या दो से अधिक परमाणुओं के रासायनिक संयोग से बनता है।

अपरूपी पदार्थ (Allotrophy): जब एक ही तत्व से दो या दो से अधिक पदार्थ बनता है तो उन बने पदार्थों को अपरूपी पदार्थ कहते है। तत्व के इस गुण को अपरूपी कहा जाता है। जैसे – डायमण्ड और ग्रेफाइट, कार्बन के दो अपरूप है। सफेद फास्फोरस तथा लाल फास्फोरस, फास्फोरस तत्व के दो अपरूप है।

समावयवी पदार्थ (Isomers): उन यौगिकों को जिनके अणुसूत्र समान होते हैं किन्तु उनकी अणु संरचना भिन्न-भिन्न होती है तथा जिनके कारण इनके गुण भी भिन्न-भिन्न होते हैं, समावयवी पदार्थ कहलाते हैं। जैसे – अमोनिया साइनेट तथा यूरिया समावयवी पदार्थ है ।

प्रस्वेद्य पदार्थ (Deliquescent): जब कोई पदार्थ नम वायु में रखने पर वायु से नमी लेकर संतृप्त विलयन बना लेते हैं उन्हें प्रस्वेद कहते हैं। जैसे:-सोडियम हाइड्रॉक्साइड, पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड आदि।

आर्द्रताग्राही पदार्थ (Hygroscopic): जब कोई पदार्थ नम वायु में रखने पर प्रस्वेघ की भांति संतृप्त विलयन न बनाकर वायु से नमी लेकर हाइड्रेट या हाइड्रॉक्साइड बनाता है उसे उस पदार्थ का आर्द्रताग्राही कहते हैं। जैसेः निर्जल कॉपर सल्फेट, बिना बुझा चुना आदि ।

उत्फुल्ल पदार्थ (Efflorescent): जब कोई क्रिस्टलीय पदार्थ वायु में रखने पर अपना कुछ या सारा क्रिस्टलीय जल वायू को दे देता है, वह उत्फुल्ल पदार्थ कहलाता है। जैसे – फेरस सल्फेट (हरा कसीस) पोटाश, आदि।

गुणित अनुपात के नियम (Law of multiple proportion): जब दो तत्व संयोगकर दो या दो से अधिक यौगिकों का निर्माण करते हैं तो इनमें एक तत्व का भिन्न-भिन्न भार जो दूसरे तत्व के निश्चित भार से संयोग करते हैं, आपस में सरल अनुपात में होते हैं।

जैसे – (i) हाइड्रोजन और ऑक्सीजन परस्पर संयोग कर दो विभिन्न यौगिक (जल और हाइड्रोजन परऑक्साइड) बनाते हैं।
(ii) जल में भार के अनुसार हाइड्रोजन का 1 भाग ऑक्सजीन के 8 भागों से संयुक्त रहता है।

कोलाइडल मिश्रण – ये विषम मिश्रण हैं। इनमें दो चरण होते हैं, अर्थात् फैलाव चरण और फैलाव माध्यम। ये बड़े विलेय कणों की उपस्थिति के कारण प्रकाश को बिखेर सकते हैं, यानी, वे टिंडल और ब्राउनियन के प्रभाव को दर्शाते हैं।
आकाश का नीला रंग हवा में निलंबित धूल कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण भी है। वे एक विशेष तकनीक से अलग होते हैं जैसे सेंट्रीफ्यूजेशन।

🙂 🙂

प्रिय उम्मीदवारों, इस रसायन विज्ञान नोट्स श्रृंखला में हमने जनरल केमिस्ट्री नोट्स के लिए States of Matter in Hindi – पदार्थ की प्रकृति – हिंदी में कुछ सबसे महत्वपूर्ण और परीक्षा प्रासंगिक बिंदुओं पर चर्चा की है जो की रसायन विज्ञान की तैयारी में आपकी सहायता करेगा ।

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