Force and Motion Notes: 30 best facts with pdf.

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Force and Motion notes: General Physics in Hindi

Hello Aspirants, Force and Motion Notes: 30 best facts with pdf Notes Series में, हम General Physics in Hindi – Force and Motion Notes के एक महत्वपूर्ण अध्याय पर चर्चा करने जा रहे हैं।

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Force and Motion Notes – विराम तथा गति

विराम (Rest)

यदि किसी निकाय की स्थिति समय के संबंध में नहीं बदलती है, और न ही उसकी स्थिति में कोई बदलाव होता है, तो वस्तु को विराम की स्थिति में कहा जाता है।

जैसे- सड़क पर कार, सड़क के सापेक्ष विरामावस्था में है।

गति (Motion)

गति को समय के संबंध में किसी वस्तु की स्थिति में परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया गया है। जब एक वस्तु की स्थिति किसी दूसरी वस्तु के सापेक्ष समय के साथ निरन्तर बदलती रहती है, तो वस्तु गति की अवस्था में कही जाती है।

  • कोई वस्तु या निकाय यदि किसी अन्य वस्तु की अपेक्षा विराम (Rest) में है तो दूसरे वस्तु की अपेक्षा वह गति की अवस्था में हो सकती है।

जैसे- चलती बस में बैठा आदमी बाहर की वस्तुओं की अपेक्षा गति में है, लेकिन बस में बैठे दूसरे व्यक्ति की अपेक्षा, वह विराम की अवस्था में है।

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Force and Motion Notes: अदिश तथा सदिश राशि

अदिश राशि (Scalar Quantities)

वैसी भौतिक राशियाँ जिनके पास केवल परिमाण (Magnitude) होती है उन्हें अदिश राशि कहते हैं।अदिश राशि दिशाहीन होती है।

उदाहरण: लम्बाई, समय, द्रव्यमान, घनत्व, आयतन, क्षेत्रफल, कार्य, ऊर्जा, शक्ति, गुरूत्वीय विभव, विद्युत विभव, दाब, विद्युत वाहक बल, विद्युत धारा इत्यादि।

सदिश राशि (Vector Quantities)

वैसी भौतिक राशियाँ जिनके पास परिमाण तथा दिशा दोनों की होती है, सदिश राशियाँ कहलाती हैं। उदाहरण: विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, रेखीय संवेग बल-आघूर्ण, कोणीय संवेग आदि।

Force and Motion Notes: दूरी तथा विस्थापन

दूरी (Distance)

यह एक विशेष समय अंतराल में एक निकाय द्वारा चली गई वास्तविक पथ की लंबाई है। किसी समय में गतिशील वस्त द्वारा चली गई कुल लम्बाई को दूरी कहा जाता है। यह एक अदिश राशि है।

विस्थापन (Displacement)

यह किसी वस्तु की अंतिम और प्रारंभिक स्थिति के बीच मापी जाने वाली सबसे छोटी दूरी है। यह एक सदिश राशि है और इसका मान धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।

साथ ही, विस्थापन का परिमाण दूरी के परिमाण के बराबर हो भी सकता है और नहीं भी अर्थात यह गति के पथ से स्वतंत्र है।

Force and Motion Notes : चाल, वेग और त्वरण

चाल (Speed)

इकाई समय में किसी वस्तु द्वारा स्थानांतरित की गई दूरी को गति कहा जाता है। यह एक अदिश राशि है और इसका परिमाण हमेशा वेग के परिमाण के बराबर या अधिक ( ≥) हो सकता है।

  • Average speed = total distance covered / total time taken.

  • Unit – m/s or km/hr.

वेग (Velocity)

किसी निकाय के विस्थापन के परिवर्तन की दर को वेग कहा जाता है। यह एक सदिश राशि है, इसलिए हम कह सकते हैं कि वेग किसी निश्चित दिशा में गति करने वाली वस्तु की गति है।वेग सकारात्मक या नकारात्मक भी हो सकता है।

  • Velocity = Displacement / Time.

त्वरण (Acceleration)

त्वरण किसी विशेष समय अंतराल में वेग में परिवर्तन की दर है। वेग में जिस दर से परिवर्तन होता है उसी दर को त्वरण कहा जाता है। त्वरण के लिए बाह्य बल की आवश्यक होती है तथा इसकी दिशा सदैव बल की दिशा में होती है।

  • a = change in velocity/time.

  • a = (v-u)/t, where, a → acceleration, v = final velocity, u= initial velocity.

  • SI unit is m/s².

समान वेग में गति करने वाली किसी वस्तु के लिए, समय के किसी भी अंतराल के दौरान वेग में परिवर्तन की दर शून्य हो जाती है, लेकिन गैर-समान वेग के दौरान, समय के किसी भी अंतराल के दौरान वेग में परिवर्तन की दर शून्य नहीं होती है।

मंदन (Retardation): अगर किसी निकाय के विस्थापन के परिवर्तन की दर ऋणात्मक होती है तो वैसे त्वरण को मंदन (Retardation) कहते हैं। इसका मात्रक भी  m/s² होती है।

Force and Motion Notes – वृत्तीय गति और कोणीय वेग

वृत्तीय गति (Circular Motion)

जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ में गति करती है, तो उस वृत्ताकार पथ के चारों ओर किसी वस्तु की गति को वृत्तीय गति के रूप में जाना जाता है।

किसी वृत्तीय पथ पर एक समान गति करते हुए पिण्ड की चाल नियत रहती है, जबकि उसका वेग प्रत्येक बिन्दु पर परिवर्तित होता है। इस प्रकार की गति में, वस्तु द्वारा यात्रा की गई शुद्ध दूरी शून्य होती है।

कोणीय वेग (Angular Motion)

किसी वस्तु द्वारा वृत्तीय गति में कोणीय विस्थापन की समय-दर को कोणीय वेग कहा जाता है। इसका मात्रक रेडियन/से. (radian /sec.) होता है।

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गति के नियम (Laws of Motion): Force and Motion Notes

Newton’s First Law of Motion

“प्रत्येक वस्तु अपनी विरामावस्था या सरल रेखा पर एक समान गति की अवस्था में तब तक रहती है जब तक कि उस पर लगे हुए बाह्य बल के द्वारा वह अपनी अवस्था में परिवर्तन के लिए बाध्य न करें।”

जड़त्व (Inertia)

इस नियम को जड़ता या गैलीलियो के नियम के रूप में भी जाना जाता है। न्यूटन के गति का पहला नियम जड़ता को परिभाषित करता है।

जड़ता एक शरीर का गुण है जिसके कारण वह अपनी स्थिति को बनाए रखने की कोशिश करता है या जड़ता किसी वस्तु की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है जो अपनी गति की स्थिति या उसके आराम की स्थिति में परिवर्तन का विरोध करती है।

  • किसी वस्तु की जड़ता को उसके द्रव्यमान से मापा जाता है।

जैसे-: चलती हुई कार में बैठा एक व्यक्ति आगे की ओर धक्का महसूस करता है जब कार अचानक रुक जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यात्री के पैर कार के साथ-साथ बाकी हिस्सों के संपर्क में रहते हैं लेकिन उसके शरीर का ऊपरी हिस्सा गति की जड़ता के कारण झुक जाता है।

जड़त्व के प्रकार

जड़त्व के दो प्रकार होते है –

(i) विराम जड़त्व (Inertia of Rest) और (ii.) गतिज जड़त्व (Inertia of Motion)

i. विराम जड़त्व (Inertia of rest): विराम जड़त्व वस्तु का वह गुण है जिसके कारण वस्तु विरामावस्था में रहना चाहती है। जैसे – काँच के ग्लास पर एक पोस्टकार्ड रखकर उसके मध्य में एक सिक्का रखकर कार्ड को एकाएक झटके से खींच लेने पर सिक्का ग्लास में गिर जाता है।

ii. गति जड़त्व (Inertia of Motion): गति जड़त्व किसी वस्तु का वह गुण है, जिसके कारण गतिशील वस्तु गति की अवस्था में ही रहना चाहती है। जैसे तेज चलती हुई बस के एकाएक रूकने पर उसमें बैठा व्यक्ति आगे की तरफ झुक जाता है।

Newton’s Second Law of Motion

“संवेग में परिवर्तन की दर लगाए गए बल के समानुपाती होता है तथा यह परिवर्तन उस दिशा में होता है जिस दिशा में बल आरोपित किया जाता है।”

गति का दूसरा नियम यह भी बताता है कि किसी वस्तु की गति में परिवर्तन की दर बल की दिशा में लागू असंतुलित बल के समानुपाती होती है।

बल (Force): गति का दूसरा नियम बल की परिभाषा देता है। बल वह भौतिक कारण है जो किसी वस्तु को एक निश्चित परिवर्तन से गुजरने का कारण बनता है, जो किसी वस्तु में लगाकर उसकी अवस्था में परिवर्तन ला देता है या परिवर्तन लाने की चेष्टा करता है।

  • Force , F = mass (m) x acceleration (a)
  • न्यूटन के गति के दूसरे नियम से बल का माप होता है। यह एक सदिश राशि है। इसका SI मात्रक kgm/s होता है जिसे न्यूटन (N) भी कहा जाता है।

बलों के भौतिक स्वतन्त्रता का सिद्धांत : अगर किसी वस्तु पर एक ही समय में दो या दो से अधिक बल भिन्न-भिन्न दिशा में कार्य करते हैं तो प्रत्येक बल अपना-अपना प्रभाव वस्तु पर अपनी-अपनी दिशा में डालता है।

  • उदाहरण : क्रिकेट के खेल में, एक फील्डर गेंद को पकड़ने के दौरान धीरे-धीरे अपना हाथ पीछे की ओर खींचता है।
  • वह ऐसा समय अवधि बढ़ाने के लिए करता है जिसमें गतिमान गेंद का उच्च वेग शून्य तक कम हो जाता है और साथ ही साथ गेंद का त्वरण भी कम हो जाता है और इस प्रकार तेज़ गति वाली गेंद को पकड़ने का प्रभाव कम हो जाता है।

Newton’s Third Law of Motion

प्रत्येक क्रिया के बराबर तथा विपरीत एक प्रतिक्रिया होती है

अर्थात् जब एक वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर बराबर तथा विपरीत दिशा में बल लगाती है।

पहली वस्तु द्वारा दूसरी वस्तु पर लगाया गया बल क्रिया (Action) तथा दूसरी वस्तु द्वारा पहली वस्तु पर लगाया गया बल प्रतिक्रिया (Reaction) कहलाती है।

  • उदाहरण: तैरते समय, एक व्यक्ति पानी को पीछे की ओर धकेलता है (क्रिया) तो पानी उसी बल (प्रतिक्रिया) के साथ तैराक को आगे धकेलता है।

इन दोनों बलों (क्रिया और प्रतिक्रिया) में हमेशा समान परिमाण और विपरीत दिशा होती है और एक ही वस्तु के बजाय विभिन्न वस्तुओं पर कार्य करते हैं।

लेकिन समान परिमाण होने के बावजूद, ये बल समान परिमाण के त्वरण का उत्पादन नहीं कर सकते हैं क्योंकि प्रत्येक बल अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करता है जिसमें विभिन्न द्रव्यमान हो सकते हैं।

  • उदाहरण – जब बंदूक से गोली चलाई जाती है, तो वह बंदूक के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया बल लगाती है लेकिन चूंकि बंदूक में अधिक द्रव्यमान होता है, इसलिए बंदूक का त्वरण गोली की तुलना में बहुत कम होता है।

Force and Motion Notes in Hindi – संवेग और आवेग

संवेग (Momentum, )

किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा उसके वेग के गुणनफल को उस वस्तु का संवेग कहा जाता है।  किसी वस्तु की गति को बदलने के लिए आवश्यक बल उस समय अंतराल पर निर्भर करता है जिस समय गति बदली जाती है।

  • संवेग (P)= द्रव्यमान (M) x वेग (V)

  • यह एक सदिश राशि है। इसका मात्रक किग्रा मी./से. (kg m/s) होता है।

आवेग (Impulse)

यदि एक बल एक छोटी अवधि के लिए एक शरीर पर कार्य करता है, तो बल और समय के उत्पाद को आवेग कहा जाता है।

  • आवेग = गति में परिवर्तन = बल x समय अंतराल। 
  • Impulse = Change in momentum = Force x Time interval.
  • SI unit – N-s या kg-m/s है।

संवेग संरक्षण का सिद्धांत (Principle of Conservation of Momentum)

यदि किसी बाहरी बल की अनुपस्थिति में दो या दो से अधिक वस्तुओं के संवेग का योग किसी भी दिशा में सदैव स्थिर रहता है तो इसे संवेग के संरक्षण का सिद्धांत कहा जाता है।

  • P = MV= m1V1  + m2V2  + m3V3

Force and Motion Notes: संतुलन (Equilibrium)

यदि वस्तु पर लगे बलों पर कार्य करने वाली सभी शक्तियों का परिणाम शून्य हो और इनमें किसी बल के कारण आघूर्ण न हो तो वस्तु संतुलन की अवस्था में कही जाती है।

  • कोई वस्तु यदि संतुलन में है, तो यह या तो विराम की अवस्था में होगा या एकसमान गति में होगा।
  • यदि यह विराम की अवस्था है तो संतुलन को स्थिर (Static) कहा जाता है, अन्यथा गतिशील (Dynamic)।

संतुलन के प्रकार

संतुलन तीन प्रकार के होते हैं –

i. स्थायी संतुलन (Static Equilibrium)  

ii. अस्थायी संतुलन (Unstable Equilibrium) 

iii. उदासीन संतुलन (Neutral Equilibrium)

स्थायी संतुलन (Static Equilibrium)

यदि संतुलन की स्थिति से थोड़ा विस्थापन होने पर, किसी वस्तु की अपनी मूल स्थिति को पुनः प्राप्त करने की प्रवृत्ति होती है, तो इसे स्थिर संतुलन में कहा जाता है।

  • उदाहरण : सड़क पर खड़ी कार ।

अस्थिर संतुलन (Unstable Equilibrium)

यदि संतुलन स्थिति से थोड़ा विस्थापन पर, एक शरीर विस्थापन की दिशा में आगे बढ़ता है और अपनी मूल स्थिति को पुनः प्राप्त नहीं करता है, तो संतुलन को अस्थिर संतुलन में कहा जाता है।

  • अस्थिर संतुलन में, शरीर के गुरुत्वाकर्षण का केंद्र उच्चतम स्थान पर होता है।

उदासीन संतुलन (Neutral Equilibrium)

यदि संतुलन की स्थिति से थोड़ा विस्थापन होने पर, किसी पिंड की अपनी मूल स्थिति में वापस आने या विस्थापन की दिशा में बढ़ने की प्रवृत्ति नहीं होती है, तो इसे तटस्थ संतुलन में कहा जाता है।

  • उदासीन संतुलन में, गुरुत्वाकर्षण का केंद्र हमेशा एक ही ऊंचाई पर रहता है।
  •  उदाहरण : मेज पर रखी हुई गेंद

Force and Motion Notes – अभिकेन्द्रीय बल v/s अपकेन्द्रीय बल

अभिकेन्द्रीय बल (Centripetal Force)

किसी पिण्ड को वृत्ताकार मार्ग में गति बनाए रखने के लिए, वृत्त के केन्द्र की ओर एक बल आवश्यक होती है जो केंद्र की ओर निर्देशित होता है। इस बल को अभिकेन्द्रीय बल (Centripetal Force) कहा जाता है।

  • F= mv²/r,  M = पिण्ड का द्रव्यमान और V  = पिण्ड का वेग, r =  वृत्ताकार पथ की त्रिज्या। 

प्रकृति में पाई जाने वाली बल जैसे कि घर्षण बल, गुरुत्वाकर्षण बल, विद्युत बल, चुंबकीय बल आदि, एक अभिकेन्द्रीय बल के रूप में कार्य कर सकते हैं। जैसे –

  • एक साइकिल चालक आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्राप्त करने के लिए अपने शरीर को केंद्र की ओर मोड़ता है।
  • मौत के कुएँ में मोटरसाइकिल सवार का चलना।
  • उपग्रहों का ग्रहों की परिक्रमा करना।

अपकेन्द्रीय बल (Centrifugal Force)

जब कोई पिण्ड किसी वृत्ताकार पथ पर चलता है तो उसकी गति को बनाए रखने के लिए केन्द्र से बाहर की ओर एक बल लगता है, जिसे अपकेन्द्रीय बल कहते हैं।

अपकेन्द्रीय बल एक ऐसी छद्म शक्ति है जो हमेशा अभिकेन्द्रीय बल के बराबर और विपरीत होता है, और हमेशा वृत्त के केन्द्र से बाहर की ओर निर्देशित होता है।

  • उदाहरण : मक्खन अलग करने की मशीन, वाशिंग मशीन।

Force and Motion Notes: घर्षण (Friction)

What is Friction(घर्षण) in Hindi? घर्षण वह बल है जो दो वस्तओं के आपस में संपर्क में रहने से लगता है जिसके कारण वस्तु की गति में विरोध उत्पन्न होता है। घर्षण बल वस्तु का गति के दिशा के विपरीत लगता है।

Types of Friction in Hindi – घर्षण के प्रकार

घर्षण तीन प्रकार के होते हैं-

  • स्थैतिक घर्षण (Static Friction) 
  • सर्पी घर्षण (Sliding Friction)
  • लोटनिक घर्षण (Rolling Friction)

स्थैतिक घर्षण (Static Friction)

जमीन पर रखी कोई वस्तु को जब खिसकाने के लिए बल लगाया जाए और वह नहीं खिसके अर्थात् दोनों सतहों के बीच घर्षण बल कार्य कर रहा है, इसी बल को स्थैतिक घर्षण कहते हैं।

सर्पी घर्षण (Sliding Friction)

जब कोई वस्तु किसी धरातल पर सरकती है तो इस वस्तु एवं धरातल के मध्य लगने वाले घर्षण बल को सर्पी घर्षण कहते हैं।

लोटनिक घर्षण (Rolling Friction)

जब एक वस्तु किसी सतह पर लुढ़कती है तो दोनों के बीच लगने वाला घर्षण बल लोटनिक घर्षण कहलाता है।

  • जब दो शरीर एक दूसरे पर लुढ़कती हैं (जैसा कि बॉल बेयरिंग के मामले में), लोटनिक घर्षण कहलाती है।
  • जब दो शरीर वास्तव में एक दूसरे के ऊपर सरकती हैं, तो सर्पी घर्षण कहलाती है।

घर्षण बल के उपयोग

  • ब्रेक घर्षण के आधार पर काम करता है।
  • बेल्ट के माध्यम से मशीन के एक भाग से दूसरे भाग में गति का हस्तांतरण घर्षण द्वारा संभव है।
  • घर्षण बल के कारण हम सीधा खड़ा हो सकते हैं।
  • घर्षण बल के कारण हम जमीन पर चल पाते हैं।

घर्षण बल से हानि

  • मशीनों में घर्षण के कारण अधिक ऊर्जा व्यय होती है और मशीनों का जीवनकाल कम हो जाता है।
  • घर्षण से गाड़ियों के पहिये घिस जाते हैं।

Force and Motion Notes: 30 most important questions in Hindi

Top 30 most important facts- महत्वपुर्ण प्रश्न

SN Question Answer
1. केन्डिला किसका मात्रक है? ज्योति तीव्रता (Luminious Intensity)
2. प्रत्यास्थता (Elasticity) का S.I. मात्रक क्या है ? न्यूटन/मी.
3. पारसेक (Parsec) किसका इकाई है ? दूरी
4. ल्यूमेन (Lumen) किसका मात्रक है ? ज्योति फ्लक्स (Luminious Flux)
5. पास्कल (Pa) किसका इकाई है? दाब (Pressure)
6. किसी पदार्थ के संवेग और वेग के अनुपात से कौन-सी भौतिक राशि प्राप्त की जाती है ? द्रव्यमान (Mass)
7. स्वतंत्र रूप से गिरने वाली वस्तुओं का ? समान त्वरण होता है
8. रॉकेट किस सिद्धान्त पर कार्य करता है संवेग संरक्षण (Principle of Conservation of Momentum)
9. Bike यदि एकाएक चलना प्रारम्भ कर दे तो Biker के गिरने की आशंका का कारण है ? विराम जड़त्व (Inertia of Rest)
10. चलती हुई कार में बैठा एक व्यक्ति आगे की ओर धक्का महसूस करता है जब कार अचानक रुक जाती है, इसको किसके द्वारा समझाया जा सकता है? ? जड़त्व (Inertia)द्वारा
11. एक अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी तल की तुलना में चन्द्र तल पर अधिक ऊंची छलांग लगा सकता है, क्योंकि पृथ्वी की तुलना में चाँद का गुत्वाकर्षण बल कम होता है।
12. “प्रत्येक वस्तु अपनी विरामावस्था या सरल रेखा पर एक समान गति की अवस्था में तब तक रहती है जब तक कि उस पर लगे हुए बाह्य बल के द्वारा वह अपनी अवस्था में परिवर्तन के लिए बाध्य न करें।”

यह Newton के किस नियम में कहा गया है ? ?

न्यूटन का गति विषयक प्रथम नियम (Newton’s first law of motion.)
13. कार्य का मात्रक है? जूल (Joule)
14. ऐम्पियर मात्रक है विद्युत् धारा का
15. 1 किलोग्राम राशि का वजन होता है 9.8 N
16. प्रकाश वर्ष इकाई है? दूरी की
17. किसी मनुष्य का भार पृथ्वी पर यदि 600 N है तब चन्द्रमा पर उसका भार कितना होगा? 100N
18. जड़त्व आघूर्ण (Inertia) व कोणीय त्वरण (Angular accelaration) का गुणनफल होता है टॉर्क (Torque)
19. यदि किसी बोतल में पानी भरा कर उसे जमने दिया जाए तो बोतल टूट जाती है, क्योंकि? पानी जमने पर फैलता है।
20. यदि एक बोतल में पानी पर बर्फ तैर रही है और जब बर्फ पूर्णतः पिघल जाए तो बोतल में पानी का तल? उतना ही रहेगाी
21. पृथ्वी के भीतर जाने पर किसी वस्तु के भार में क्या परिवर्तन आते हैं ? वस्तु का भार घटता है।
22. पृथ्वी के केंद्र में जाने पर किसी वस्तु के भार में क्या परिवर्तन आते हैं ? वस्तु का भार शून्य हो जाता है।
23. जब बर्फ पानी में तैरती है तो उसके आयतन कितना भाग पानी के ऊपर रहता है ? 1/10 भाग।
24. वायुमंडल का दाब किस यंत्र के द्वारा मापा जाता है ? बैरोमीटर
25. वायुयान में फाउंटेन पेन की स्याही रिसने का कारण ? वायुमंडल दाब की कमी
26. दूध के घनत्व को नापा जाता है ? लैक्टोमीटर से
27. किस सिद्धांत का उपयोग सोने की अंगूठी की शुद्धता ज्ञात करने में की जाती है ? आर्कमेडिस का सिद्धांत।
28. किस बल के कारण हम सीधा खड़ा हो सकते हैं ? घर्षण बल
29. यदि कोई लिफ्ट एक समान वेग से ऊपर या निचे जाती है तो पिंड के भर में क्या परिवर्तन होंगे ? कोई परिवर्तन नहीं होगा।
30. यदि निचे उतरते समय लिफ्ट का त्वरण, गरूत्वाकर्षण त्वरण से अधिक हो जाये तो क्या होगा ? लिफ्ट पर खड़े व्यक्ति का सिर लिफ्ट के छत से टकरा जायेगा।

🙂

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