Jharkhand Medieval History 9 Important Facts !!

झारखण्ड मध्यकालीन इतिहास

Hello Aspirants, Jharkhand Gk in Hindi की इस Series में हम आपको  Jharkhand Medieval History – झारखण्ड मध्यकालीन इतिहास के बारे में विस्तार से बताएँगे।

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 Jharkhand GK in Hindi Series में Jharkhand राज्य में आयोजित सभी प्रतियोगिता परीक्षाओं में जैसे JPSC, JSSC CGL etc. आपकी तैयारी में मद्दद करेगा।

Jharkhand Medieval History – सल्तनत काल (1206 – 1526)

सल्तनत काल में झारखण्ड प्रायः स्वतंत्र रहा और यहाँ कुछ गिने -चुने ही आक्रमण हुए। जैसे –

1. वीरभूम के राजा का सिंघभूम पर आक्रमण,

2. ओडिशा के शासक द्वारा संथाल परगना पर आक्रमण और

3. मुहम्मद-बिन-तुगलक का सेनापति मल्लिक बयां का हज़ारीबाग़ क्षेत्र पर आक्रमण।

ये सभी आक्रमण बंगाल-ओडिशा के शासको का आपसी रंजिश के कारण हुआ। क्यूंकि झारखण्ड भौगोलिक स्तिथि और वनों के घनत्त्वता के कारण इनके छुपने के लिए एक सुरक्षित जगह प्रदान करती था ।

Jharkhand Medieval History – क़ुतुबउद्दीन ऐबक काल

क़ुतुबउद्दीन ऐबक के सेनापति बख्तियार खलजी ने (1202-03 ई.)

बंगाल के सेन वंशी शासक लक्ष्मण सेन की राजधानी नदिया पर आक्रमण के लिए झारखण्ड क्षेत्र का इस्तेमाल किया था।

बख्तियार खलजी ने ही नालंदा, विक्रमशिला और उदंतीपुरी विश्वविद्यालयों को जला कर बर्बाद कर डाला था।

जब बख्तियार खलजी दक्षिण बिहार में खून खराबा और उत्त्पात मचा रहा था तब वहाँ के लोग भाग कर झारखण्ड में सरन ले रहे थे तभी बख्तियार खलजी के इस मार्ग के बारे में पता चला था।

तुर्क/गुलाम वंशकालीन झारखण्ड (1206-90)

तुर्क/गुलाम वंशकालीन झारखण्ड का कोई प्रभाव झारखण्ड क्षेत्र पर नहीं पड़ा था। इसका प्रमाण इनके समकालीन नागवंशी शासक हरीकर्ण अपनी सत्ता पर बरक़रार थे और शांतिपूर्ण तरीके से अपना राज्य चला रहे थे।

खिलजी वंशकालीन झारखण्ड (1290-1320)

खिलजी वंश का झारखण्ड में प्रभाव पड़ा। झारखण्ड के नागवंशी शासक ने सुल्तान अल्लाहुद्दीन खिलजी के सेनापति छज्जू मालिक को कर देना आरम्भ किया।

इसके साथ ही झारखण्ड में पहली बार (1310 ई) मुसलमान शासको का प्रभुत्व स्थापित होना आरम्भ हुआ।

Jharkhand Medieval History – तुगलक वंशकालीन झारखण्ड (1320-1412)

तुगलक वंशकालीन झारखण्ड में दो बड़ी घटनाएं घटी।

1. सुलतान मुहम्मद-बिन-तुगलक के सेनापति मल्लिक बया ने हज़ारीबाग़ (चाई-चप्पा) क्षेत्र पर आक्रमण (1340 ई) किया। संथाली स्रोत के अनुसार हमलावर का नाम इब्राहिम अली था।

इस आक्रमण में मल्लिक बया/इब्राहिम अली ने बीघा के किले पर अधिकार स्थापित कर लिया।

2. फ़िरोज़ तुगलक ने बंगाल के शासक शम्मसुद्दीन को पराजित कर के सतगावां (हज़ारीबाग़) पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया और सतगावां को इस क्षेत्र का राजधानी बनाया।

सैय्यद वंशकालीन (1412-1451) 

झारखण्ड इस काल खंड में पूर्णतः स्वतंत्र रहा और सैय्यद वंश के सुल्तानों का झारखण्ड में कोई हस्तक्षेप नहीं हुआ।

Jharkhand Medieval History – लोदी वंशकालीन झारखण्ड (1451-1426)

इस वंश का भी झारखण्ड में कोई हश्तक्षेप नहीं हुआ क्यूंकि इस वंश के शासक अपेक्षाकृत कमजोर थे और इनका शासन सिर्फ दिल्ली तक ही सिमित था।

परन्तु इसी कालखंड में दो महत्वपूर्ण घटना झारखण्ड के कुछ क्षेत्रों में घटी

1. लोदी वंश के समकालीन गजपति वंश (ओडिशा ) के प्रतापी शासक कपिलेन्द्र गजपति का झारखण्ड  पर आक्रमण हुआ और उसने नागवंशी राज्य के एक बड़े हिस्से पर अपना अधिकार  स्थापित कर लिया।

2. खानदेश का एक अत्यंत शक्तिशाली शासकआदिल शाह II /आदिल खान II ने अपनी सेना को झारखण्ड भेजा और “झारखंडी सुल्तान “ (जंगल का राजा ) का उपाधि धारण किया।

Jharkhand Medieval History – मुग़ल कालीन झारखण्ड (1526 – 1707 ई)

भारत में मुग़ल वंश की स्थापना बाबर ने 1526 ई में किया। उसने लोदी वंश के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी को पानीपत  की पहली लड़ाई (1526 ई ) में पराजित किया और इस पराजय के साथ  दिल्ली सल्तनत का भी अंत हो गया।

इस युद्ध में पहली बार तोप (artillery) का इस्तेमाल बाबर के द्वारा की गयी थी और इस प्रकार भारत मे तोप का इस्तेमाल की शरुवात हुई।

हालाँकि, बाबर (1526 – 1530 ई ) का शासन ज्यादा दिन तक नहीं रहा इस कारण झारखण्ड इसके प्रभाव क्षेत्र से बाहर था।

हुमायूँ काल (1530 – 1540 ई )

इस काल खंड ने  झारखण्ड में काफी उथल – पुथल मचा दिया था।

इसका  कारण अफ़ग़ानों और मुग़लों के बीच की आपसी रंजिश थी क्यूंकि बाबर ने अफ़ग़ानों को ही अपदस्त कर के दिल्ली में मुग़ल वंश का स्थापना किया  था। 

इसलिए अपने खोये हुए राज्य को पुनः प्राप्त करने के लिए अफ़ग़ान शासक निरंतक मुघलो पर आक्रमण करते और फिर बिहार-बंगाल के रस्ते झारखण्ड में छुप जाते थे।

इस अफ़ग़ान शासकों  में  एक था शेरशाह सूरी / शेर खान । एक बार शेरशाह का पीछा करते हुए हुमायूँ झारखण्ड के भुरकुंडा (हज़ारीबाग़ ) तक घुस आया था।

मुसलमानों को इस क्षेत्र से अवगत शेरशाह सूरी ने ही कराया था।

Jharkhand Medieval History – शेरशाह सूरी / शेर खान

शेरशाह सूरी ने झारखण्ड जन -जीवन में तहस-नहस मचा रखा था। मुग़लों के द्वारा हार के कारण वह दक्षिण बिहार आया और वहीँ पर अपना कब्ज़ा स्थापित कर लिया।

वह बंगाल के शासक पर आक्रमण करता और लूट पाट मचता। इसी क्रम में वह कई बार झारखण्ड का इस्तेमाल करता था। शेरशाह सूरी ने  तेलियागढ़ी  (राजमहल ) और रोहतासगढ़ (उत्तर प्रदेश) पर अधिकार स्थापित कर लिया था।

1538 ई में शेरशाह सूरी का सेनापति ख़्वास खान पलामू के चेरों शासक  महारथ चेरो का दमन करने के लिए सेना भेजा क्यूंकि वह शेरशाह सूरी के क्षेत्र पर लूट-पाट मचता था और बंगाल के रस्ते में अवरुद्ध उत्त्पन करता था।

अहमद यादगार (तारीख-ए -शेरशाही ) के अनुसार ख़्वास खान के आक्रमण का मुख्या कारण  महारथ चेरो का दमन और श्याम सूंदर नमक एक सफ़ेद हाथी को प्राप्त करना था।

चौसा का युद्ध (1539 ई ): चौसा का युद्ध में शेरशाह ने हुमायूँ को पराजित किया और इस प्रकार रोहतास से वीरभूम तक का क्षेत्र शेरशाह सूरी के आधीन आ गया और राजमहल (संथाल परगना ) का क्षेत्र शेरशाह के अधीन हो गया।

हालाँकि मुस्लमान आक्रांताओं को झारखण्ड क्षेत्र से अवगत शेरशाह ने कराया था पर इस क्षेत्र पर असल अतिक्रमण अकबर काल खंड में शुरू हुआ।

Jharkhand Medieval History अकबर के काल में क्षेत्रीय राजवंशो की स्तिथि जानने के लिए पढ़े –

History of Jharkhand regional dynasties-Introduction

History of Jharkhand – Regional Dynasties – Detail

Dear AspirantsJharkhand GK in Hindi series में हमने Jharkhand Medieval History – झारखण्ड मध्यकालीन इतिहास के बारे में discuss किया। यह आर्टिकल आपको Jharkhand में होने वाले सभी Sarkari Naukri exams में आपकी मद्दद करेगा।

Jharkhand Medieval History 9 Important Facts !!

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