History of Jharkhand in Hindi

Hello AspirantsHistory of Jharkhand in Hindi की इस Series में हम झारखण्ड का प्राचीन इतिहास History of Ancient Jharkhand in Hindi में विस्तार से बताएँगे।

History of Jharkhand in Hindi के इस Series में  Jharkhand राज्य में आयोजित सभी प्रतियोगिता परीक्षाओं में यह आपकी तैयारी को सही दिशा देने का प्रयाश है।

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History of Jharkhand in Hindi: Introduction

झारखण्ड शब्द की उत्पति दो शब्दों के मिलने पर हुई है – झार/झाड़ (वन) + खंड (प्रदेश)  = झारखण्ड। इस प्रकार झारखण्ड का शाब्दिक अर्थ हुआ – वनों का प्रदेश। 

झारखण्ड  एक आदिवासी बहुल  राज्य है, जहाँ मुख्य रूप से  छोटानागपुर पठार और संथाल परगना के वन-क्षेत्र शामिल हैं।

झारखंड राज्य पूर्वी भारत में स्तिथ है।  यह क्षेत्रफल के हिसाब से 16वां सबसे बड़ा राज्य है, और जनसंख्या के हिसाब से यह 13वां सबसे बड़ा राज्य है।

राज्य बिहार के साथ उत्तर, उत्तर-पश्चिम में उत्तर प्रदेश, पश्चिम में छत्तीसगढ़, दक्षिण में ओडिशा और पूर्व में पश्चिम बंगाल के साथ अपनी सीमा साझा करता है। इसका क्षेत्रफल 79,710 किमी (30,778 वर्ग मील) है।

झारखण्ड में पाषाण काल के अवशेष मिले हैं जिसका प्रमाण कई प्राचीन गुफा चित्रों द्वारा मिलता है। इस क्षेत्र में लोहे के उपयोग का प्रमाण 1400 ईसा पूर्व के रूप में शुरू हुआ।

यह क्षेत्र मौर्य, गुप्त, गौड़, पाल, नागवंशी, खैरावाल, रामगढ़ राज, रक्सेल, चेरो और खरगडीहा जमींदारी सम्पदा सहित कई संप्रभु और स्वायत्त शासक राजवंशों के शासन में था।

Pre-history of Jharkhand in Hindi

झारखण्ड का प्राचीन इतिहास (Pre-history of Jharkhand) को तीन युगो में बांटा गया है –

1. पुरापाषाण काल, 2. मध्य पाषाण काल, 3. नवपाषाण काल। 

History of Jharkhand in Hindi: पुरापाषाण काल (Paleolithic age)

इस युग के अवशेष प्रायः नदियों किनारे से प्राप्त हुए हैं। इस काल का प्रमाण मनुष्यो के पाए गए अवशेष से होते हैं जो सिंघभूम, हज़ारीबाग़, देवघर और  दामोदर घाटी में पाए गए हैं।

इस युग में मानव की भूमिका आखेटक – खाद्य संग्राहक (Hunters & Food gatherer) के तौर पर थी। शिकार के लिए मनुष्यो ने पत्थर के औज़ार  का उपयोग किया।

इस काल के कुछ प्रमुख प्रमाण हमें शैल चित्र दीर्घा में मिलते है जैसे- आदिमानव काल का चित्र हज़ारीबाग़ से प्राप्त हुए, अंतरिक्ष यान का चित्र, तारा मंडल इत्यादि।

History of Jharkhand in Hindi: मध्यपाषाण युग (Mesolithic age)

इस युग में मनुष्य आखेटक – खाद्य संग्राहक से पशुपालक व कृषक बना। इनके अवशेष पलामू, दुमका, रांची, हज़ारीबाग़ इत्यादि जगहों से मिले हैं।

नवपाषाण युग (Neolithic age)

इस युग में आर्यंस (Aryans) द्वारा धकेले जाने के कारन सर्वप्रथम असुरों का आगमन झारखण्ड क्षेत्र में हुआ। इस कालखंड के प्रमुख आविष्कारों में मिट्टी के बर्तन और आग का अविष्कार शामिल है।

धातु युग (Metal Age/Chalcolithic age)

झारखण्ड में पाषाण युग के बाद धातु युग आया जिसका केंद्र सिंघभूम था। ताम्र -पाषाण युग (Chalcolothic age) में पत्थरों और तांबे के बने उपकरणों का इस्तेमाल किया जाने लगा।

धातु युग को तीन युगों में बांटा गया है –

ताम्र /ताम्बा युग (Copper Age) 

इस युग में पथरों के बजाय ताम्बा से बनाया जाने लगा। तांबे से बने कुल्हाड़ी और ताम्बा का खान के अवशेष हज़ारीबाग़ से प्राप्त हुए हैं।

कांस्य युग (Bronze age)

 इस युग का विस्तार छोटानागपुर क्षेत्र में प्रमुख रूप से रहा। कासां का अविष्कार असुर और बिरजिया जनजाति के लोगों ने ताम्बा में टिन मिला कर किया।

लौह युग (Iron Age)

झारखण्ड में लौह युग का अविष्कार भी असुर और बिरजिया जनजाति ने ही किया था। इन्होने एक उत्कृष्ट लौह तकनीक का अविष्कार किया और मेसोपोटामिया (Mesopotamia) से इसका व्यापर शुरू किया।

Note – झारखण्ड में असुर, बिरजिया, खड़िया और बिरहोर प्राचीनतम जनजातियां है।

धार्मिक आंदोलन: History of Jharkhand In Hindi

जैन धर्म  

जैन धर्म का झारखंड में प्रवेश 6ठी सदी ई.प में हुआ। जैनियों के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का निर्वाण 717 ई.पू. में गिरिडीह (इसरी) जिला के एक पहाड़ पर हुआ, जिसका नामकरण उन्हीं के नाम पर पार्श्वनाथ/पारसनाथ पहाड़ पड़ा ।

मानभूम (धनबाद) जैन सभा का केन्द्र था।

➥ जैन धर्म से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रमाण –

1.चतरा में जैनों के 10वें तीर्थंकर का चरण -चिन्ह, भदुलीमाता (भद्रकाली मंदिर), के पास से मिले हैं।

2. सतबरवा (पलामू ) के पूजा-स्थल।

3. दामोदर और कंसाई नदियों की घाटी से मिले अवशेष।

➟सिंहभूम के आरंभिक निवासी जैन मतावलंबी को माना जाता है, जिन्हें सरक/ श्रावक कहा जाता था।

➟श्रावक गृहस्थ जीवन शैली के जैन मतावलंबी को कहा जाता था जिन्हे बाद में हो जनजाति के लोगों ने इन्हें सिंहभम से बाहर निकाल दिया ।

बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म का झारखंड में प्रवेश भी 6ठी सदी ई.प ही माना जाता है।

धनबाद (मानभूम) बौद्ध धर्म का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र था।

➥ बुद्ध धर्म से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रमाण –

1. पलामू से एक सिंह का शीर्ष मिला है, जो सांची स्तूप के द्वार पर उत्कीर्ण सिंह के शीर्ष से मिलता है।

2. बौद्धपुर का प्रसिद्ध बुद्धेश्वर मंदिर।

3. बुद्ध की खंडित मूर्ति, घोलमारा (पुरुलिया)।

4. सूर्यकुंड (हज़ारीबाग) से बुद्ध की मूर्ति।

5. बौद्ध विहार (बेलवादाग,खुंटी) ।

6. जोन्हा जलप्रपात से बुद्ध की प्रतिमा।

7. ईचागढ़ (सरायकेला-खरसावां) से तारा देवी की मूर्ति, जिसे राँची में एक संग्रहालय में रखा गया है।

मौर्य काल- History of Jharkhand in Hindi

मौर्य साम्राज्य की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्या ने 322 ई.पू.में  की थी।

चन्द्रगुप्त मौर्य (322 ई.पू. – 298 ई.प.)

चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने गरु कौटिल्य की मदद से धनानंद (नंद वंश) को पराजित कर मगध में मौर्य वंश की स्थापना की।

नंद की सेना में झारखंड के जनजातीय सैनिक और हाथी भी शामिल थे। इस कारण चन्द्रगुप्त मौर्य भी झारखंड क्षेत्र से परिचित था।

कौटिल्य ने कुकुट/ कुकुटदेश (झारखण्ड) में गणतंत्रात्मक शासन प्रणाली और इन्द्रवानक (ईब एवं शंख नदियों) की नदियों से हीरे प्राप्त किये जाने का वर्णन किया है।

चन्द्रगुप्त मौर्य ने ‘आटविक’ नामक पदाधिकारी की नियक्ति की थी जिसका मुख्य उद्देश्य था –

1. जनजातियों को नियंत्रण में रखना,

2. मगध के हित में उनका उपयोग करना,

3. मगध के शत्रुओं से उनके गठबंधन को रोकना तथा

4. मगध से दक्षिण भारत की ओर जाने वाला व्यापारिक मार्ग की सुरक्षा करना।

सम्राट अशोक (273 ई.पू.-232 ई.पू.) 

सम्राट अशोक ने झारखण्ड के जनजातियों पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित किया था । अशोक के 13वें शिलालेख में सीमावर्ती राज्यों की सूची मिलती है जिसमें से एक आटविक/आटवी/आटव नामक प्रदेश का उल्लेख मिलता है।

आटविक प्रदेश बघेलखंड से उड़ीसा के समुद्र तट तक का विस्तृत क्षेत्र था। इस प्रदेश में झारखंड भी शामिल था।

अशोक द्वारा भेजे गये धर्म प्रचारक की दलों में एक आटवी जनजातियों के बीच भी भेजा गया था। इस दल के नेता को रक्षित कहा गया था।

  • अशोक के कलिंग शिलालेख 2 में उड़ीसा की सीमावर्ती अविजित जनजातियों का जिक्र किया गया है।

मौर्योत्तर काल (200 ई.पू.-300 ई.)

मौर्योत्तर काल में कई विदेशी आक्रांताओं ने भारत में अपने-अपने राज्य स्थापित किए। झारखंड में भी इनकी मौजूदगी के कुछ साक्ष्य मिले हैं जैसे-

  • सिंहभूम – रोमन सम्राटों के सिक्के
  • चाईबासा-  इण्डो-सीथियन सिक्के,
  • राँची – कनिष्क के सिक्के,

गुप्त काल (355-80 ई.)- History of Jharkhand in Hindi

कुषाणों साम्राज्य के पतन के बाद प्रयाग व पाटलिपुत्र में गुप्त साम्राज्य का उदय हुआ। गुप्त वंश का सबसे महान शासक समुद्रगुप्त थे।

समुद्रगुप्त के कवि हरिषेण द्वारा रचित “प्रयाग प्रशस्ति” में समुद्रगुप्त के विजयों का वर्णन मिलता है। इन विजयों में से एक आटविक विजय थी।

बघेलखंड से उड़ीसा के समुद्र तट तक फैले आटविक प्रदेश में झारखण्ड का क्षेत्र भी शामिल था। प्रयाग प्रशस्ति में छोटानागपुर को ‘मुरुंड देश’ कहा गया है।

चन्द्रगुप्त II “विक्रमादित्य” (380-412 ई.)

गुप्त वंश के प्रसिद्ध शासक समुद्रगुप्त के बाद चन्द्रगुप्त II “विक्रमादित्य” थे।

चन्द्रगुप्त II का शासन उज्जैन से लेकर बंगाल तक विस्तृत क्षेत्र था जिसमे झारखण्ड भी प्रमुख रूप से शामिल था।

इनके शासन काल में ही चीनी यात्री फाहियान का भारत आगमन हुआ। फाहियान ने छोटानागपुर को “कुकुटलाड” कहा था।

➥ गुप्तवंशकालीन अवशेष

  •  हज़ारीबाग़ (महुदी पहाड़) -पत्थरों को काटकर बनाये गये चार मंदिर,
  •  सतगांवा का मंदिर,
  •  राँची (पिठोरिया) के एक पहाड़ी पर स्थित कुआँ आदि।

गुप्तोत्तर काल (550-650 ई.)- History of Jharkhand in Hindi

गुप्तोत्तर काल में दो प्रमुख शासक हुए –

1. गौड़ शासक शशांक, और

2. पुष्यभूति वंश (वर्धन वंश) शासक हर्षवर्दन

गौड़ शासक शशांक (602-25 ई )

शशांक मूल रूप से पश्चिम बंगाल का शासक था। इसके साम्राज्य में मिदनापुर (पश्चिम बंगाल) से सरगुजा (छत्तीसगढ़) तक का प्रान्त शामिल था।

शशांक एक कट्टर शैवोपासक थे। उसने बंगाल, बिहार और उड़ीसा पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया था। इसे बौद्धों का उत्पीड़क के नाम से भी सम्बोधन किया जाता है।

शशांक ने झारखण्ड में हिन्दू धर्म (10वी सदी ) का स्थापना किया था।


हर्षवर्धन (606–47 ई)  

हर्षवर्धन पुष्यभूति वंश (वर्धन वंश) के सबसे शक्तिशाली शासक था। इसके साम्राज्य में काजंगल (राजमहल) का छोटा राज्य शामिल था।

काजंगल में हर्षवर्धन पहली बार चीनी यात्री ह्वेनसांग से मिले थे। ह्वेनसांग ने छोटानागपुर को “किलो-ना -सु -का-ला-ना” कहा था।

पूर्व मध्य काल – History of Jharkhand in Hindi

8 वीं शताब्दी ईस्वी के मध्य में भारत में तीन शक्तिशाली साम्राज्य उभरे। ये थे –

1. पूर्व में पाल,

2. पश्चिम में प्रतिहार, और

3. उत्तर और दक्षिण में राष्ट्रकूट

पाल शासक (बंगाल)

पाल शाशकों ने वज्रयान बौद्ध शाखा को रक्षण प्रदान किया था। छिन्नमस्तिष्का मंदिर (राजरप्पा) का निर्माण भी इसी काल में हुआ।

यह मंदिर बौद्ध वज्रयोगिनी का ही हिन्दू प्रतिरूप माना जाता है।

इस काल-खंड में अन्य निर्माण

1. महामाया मंदिर (908 ई) -हापामुनि गाँव (घाघरा) का निर्माण नागवंशी शासक गजघंट राय द्वारा। 

  • मंदिर के पहले पुजारी हरिनाथ नाम के एक मराठा ब्राह्मण थे, जो गजघंट राय के धार्मिक गुरु भी थे। 

2. टांगीनाथ मंदिर (चैनपुर, गुमला) के प्रसिद्ध मंदिर का निर्माण।

history of Jharkhand in Hindi : प्रतिहार शासक महेंद्रपाल (885-910 ई)

प्रतिहार शासक महेंद्रपाल के शिलालेख की प्राप्ति इटखोरी (हजारीबाग) से हुई है, जिससे प्रतिहारों का  छोटानागपुर खास के सीमावर्ती क्षेत्रों पर कब्जे कि पुष्टि होती है ।
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Dear Aspirants, History of Jharkhand in Hindi की इस series में हमने  Ancient History of Jharkhand Hindi में discuss किया।

यह आर्टिकल आपको Jharkhand में होने वाले सभी Sarkari Naukri exams में आपकी मद्दद करेगा।

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